हमारा जीवन ही ईमानदारी से सुरु होता है और इमानदार बनते बनते ख़त्म हो जाता है, हम दुसरो को ईमानदारी का पाठ पढ़ाते हँ लेकिन खुद भूल जाते हँ, दुसरो के मार्गदर्शक बनते बनते अपने मूल्य स्वम को मालूम नहीं रहते, ये कैसा जीवन पाठ है, क्या इसको हमे बदल नहीं देना चाहिए| |
अपने अन्दर अन्द्कार लिए हम रौशनी का पाठ पठाते नहीं थकते ||
संदीप भुल्लर
09458077707
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